Interesting Facts About Axolotl :

विश्व में कई ऐसे अजीबोगरीब प्राणी पाए जाते हैं। जिनके पास अपनी क्षतिग्रस्त अंगों को दोबारा से विकसित करने का गुण पाया जाता है। और ऐसे जीवों में पहला नाम छिपकली का आता है। परंतु हम सब जानते हैं कि छिपकली सिर्फ अपनी कटी पुंछ को दोबारा से विकसित कर सकता है और आपने छिपकली को ऐसा करते देखा भी होगा।

वहीं अगर इंसानों का कोई अंग खराब हो जाए या कट जाए तो वह दोबारा नहीं उगता है। वहीं अगर दिल या किसी अन्य आंतरिक अंग में दिक्कत होती है तो उस अंग का प्रत्यारोपण किया जाता है। लेकिन किसी भी रूप में दिमाग और रीढ़ की हड्डी को नहीं बदली जा सकती है। ऐसे में इस विचित्र जीव की ये खासियत वाकई हैरान करने वाली है। परंतु, आज आज हम आपको एक ऐसे जीव के बारे में बताने जा रहे हैं, जो छिपकली के जैसा सिर्फ अपनी पूँछ ही नहीं बल्कि अपना दिल, दिमाग और पैर के साथ-साथ अपनी रीढ़ की हड्डी को भी दोबारा से विकसित कर सकता है।

दरअसल, वियना में हुए एक रिसर्च के अनुसार एक्सोलोल (Axolotl) नाम का जीव अपना दिल, दिमाग और रीढ़ की हड्डी जैसे जटिल कोशिकीय संरचनाओं को दोबारा से विकसित कर सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार एक्सोलोल के द्वारा ऐसा कर पाना वाकई आश्चर्य की बात है।

Weird Creature Regrow It’s Brain :

दुनियांँ में करोड़ों जीव-जंतु हैं, परंतु, हमसब इनमें से कुछ ही जोवों को जानते हैं। साथ ही, हमारे आस-पास जो जीव-जंतु पाए जाते हैं, उनमें अपनी विशेष खूबियां पायी जाती है। मसलन कुछ जीव ऐसे होते हैं जो अपने अंगों के कटने के बाद दोबारा इसे विकसित कर लेते हैं, जबकि कुछ जीव ऐसे भी होते हैं, जो ऐसा नहीं कर पाते हैं। यानि कि छिपकली को आपने पूंछ कटने के बाद दोबारा विकसित करते हुए देखा होगा, पर अन्य जीव ऐसा नहीं कर पाते हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे जीव के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अपने दिल, दिमाग, रीढ़ की हड्डी और पैर भी विकसित कर सकता है।

इस अजीबोगरीब प्राणी का नाम है –एक्सोलोल (Axolotl) और वैज्ञानिकों ने इसकी खोज सन् 1964 में की थी। इस जीव पर वियना में हुए रिसर्च के अनुसार एक्सोलोल (Axolotl) नाम का यह जीव अपने दिमाग की कोशिकाओं को दोबारा विकसित कर सकता है। Live Science की एक रिपोर्ट में इसका ज़िक्र किया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि सचमुच में ऐसा कर पाना आश्चर्य की बात है क्योंकि ये क्षमता किसी और जीव में नहीं पायी जाती है।

अद्भुत क्षमता का पता चला

वैज्ञानिकों की मानें तो एक्सोलोल में इतना अद्भुत क्षमता पाया जाता है कि वह जीन्स के जरिए विभिन्न कोशिकाओं को दोबारा जेनरेट कर लेता है। इसपर स्टडी करने के लिए वैज्ञानिकों ने इस जीव के सिंगल सेल NRA सिक्वेंसिंग (scRNA-seq) की प्रक्रिया को देखा, जिससे वैज्ञानिक किसी भी तरह से कोशिकाओं के विकास में मदद करने वाले जीन्स की गिनती करने में सफल रहे।

एक्सोलोटल में अद्भुत पुनर्योजी क्षमताएं होती हैं

अध्‍ययन के मुताबिक इस जीव में दिमाग की कोशिकाओं को दोबारा विकसित करने की क्षमता होती है। अगर बात करें की एक्सोलोल (Axolotl) आखिर ऐसा कैसे कर पाता है तो आपको बता दूँ कि इसके दिमाग की कोशिकाएं अलग-अलग तरह से काम करती हैं और इस वजह से इसकी दिमागी क्षमता कम नहीं होती बल्कि उसमें निरन्तरता बनी रहती है। इस जीव के दिमाग के सबसे बड़े हिस्से टेलेनसिफेलॉन पर रिसर्च की गई। जिसमें उसके दिमाग के इस हिस्से को बाहर निकाल दिया गया। इस रिसर्च में देखा गया कि 12 हफ्ते के अंदर ही एक्सोलोल (Axolotl) का दिमाग फिर से विकसित हो गया।

ऐसी क्षमता किसी और जीव में नहीं

वैज्ञानिकों के अनुसार किसी भी जीव द्वारा अपनी शारीरिक अंगों को विकसित करना उसकी विशेषता हो सकती है, लेकिन दिमाग को दोबारा विकसित कर पाना बड़ी बात है क्योंकि किसी भी जीव के दिमाग कि संरचना अन्य अंगों के अपेक्षा अधिक जटिल होती है। इसलिए छिपकली अपनी पूँछ को तो दोबारा विकसित कर सकती है पर अपने दिमाग को नहीं। परंतु, अजीबोगरीब प्राणी एक्सोलोल (Axolotl) के मामलें में यह बात एकदम से अलग है क्योंकि यह अपना दिल और रीढ़ की हड्डी के साथ – साथ शरीर की सबसे जटिल संरचना अर्थात मस्तिष्क को भी आसानी से डेवलप कर लेता है। यह ऐसा इसलिए कर पता है क्योंकि ये जीव ज़िंदगी भर न्यूरॉन्स को विकसित करता रहता है।

रिसर्च के अनुसार यह जीव शरीर का कोई भी अंग खराब होने पर सबसे पहले प्रोजेनेटर कोशिकाओं की संख्या को तेज़ी से बढ़ाता, जिससे उस डैमेज को भर लिया जाय और इस प्रक्रिया से न्यूरॉन्स की संख्या भी बढ़ जाती है।

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